Connect with us

Health News

कब्ज के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज – Home Remedies for Constipation in Hindi

Published

on

कब्ज क्या है? – What is Constipation in Hindi

कब्ज पाचन तंत्र से जुड़ी स्थिति है, जिसमें मल त्याग करते समय कठिनाई होती है। मलत्याग करते समय जब आसानी से मल गुदा मार्ग से न निकले, उस स्थिति को कब्ज कहते हैं। इस अवस्था में मल सख्त व सूखा हो सकता है। कई बार तो मल त्याग करते समय पेट व गुदा मार्ग में दर्द भी हो सकता है। वैज्ञानिक तौर पर एक हफ्ते में तीन बार से कम शौच आने को कब्ज माना जाता है। यह समस्या किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकती है। कभी यह कुछ समय के लिए होती है, तो कभी लंबे समय तक चल सकती है। यहां एक बात को समझना जरूरी है कि कब्ज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि अन्य शारीरिक विकारों का लक्षण हो सकता है (1)।

आगे पढ़ें

लेख में आगे जानते हैं कब्ज के प्रकार।

कब्ज के प्रकार – Types of Constipations in Hindi

कब्ज मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है। आइए, कब्ज के इन तीनों प्रकारों को विस्तार से जानते हैं।

  1. नार्मल ट्रांजिट कॉन्स्टिपेशन (सामान्य कब्ज) : इसे सबसे आम माना जा सकता है। इस तरह के कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को मल त्याग करने में परेशानी महसूस होती है, लेकिन वह अपने रूटीन के अनुसार सामान्य रूप से मल त्याग करता रहता है (2)
  2. स्लो ट्रांजिट कॉन्स्टिपेशन : यह बड़ी आंत में आए विकार के कारण पैदा होने वाली समस्या है। शौच की प्रक्रिया में एंटरिक नर्वस सिस्टम (ENS) की तंत्रिकाओं का अहम योगदान होता है। ये तंत्रिकाएं ही बड़ी आंत से गुदा द्वार तक शौच को लेकर आती है। इस तंत्रिका में आई असामान्यता स्लो ट्रांजिट कॉन्स्टिपेशन का कारण बनती है (3)
  3. डेफिकेशन डिसआर्डर (शौच विकार) : जिन लोगों को पुराने कब्ज की शिकायत होती है, उनमें से 50% डीफेक्शन डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं। इसका सही-सही कारण विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गुदा संबंधी अंगों में शिथिलता और उनका आपस में बिगड़ा हुआ संबंध डिफेक्शन डिसऑर्डर का मुख्य कारण है (4)

स्क्रॉल कीजिए

इस लेख का यह हिस्सा बेहद अहम है। यहां हम जानेंगे कब्ज के कारणों के बारे में।

कब्ज के कारण – Causes of Constipation in Hindi

मुख्य रूप से कब्ज की समस्या हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ी है। जैसा कि लेख के शुरुआत में बताया गया है कि कब्ज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में आ रही अन्य कमियों के कारण पैदा हो सकती है, आइए जानते हैं कैसे?

  • कम फाइबर युक्त भोजन का सेवन : फलों, सब्जियों और अनाज में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह दो प्रकार का होता है साल्युबल और इनसाल्युबल। दोनों पेट के लिए उपयोगी होते हैं। साल्युबल फाइबर पानी के साथ मिलकर जेल बनाकर पाचन को बढ़ाता है। वहीं, इनसाल्युबल फाइबर मल को मोटा और भारी करता है जिससे मल जल्दी बाहर आ जाता है। फाइबर की ये गतिविधि मलत्याग को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, फाइबर की कमी मलत्याग को बाधित करके, कब्ज का कारण बन सकती है (5) (6)
  • द्रव्य पदार्थों का कम सेवन : फाइबर को बेहतर तरीके से काम करने के लिए पानी और अन्य तरल पदार्थों की जरूरत होती है। जैसे प्राकृतिक रूप से मीठे फल, सब्जियों का रस और सूप इत्यादि। इससे मल नरम होकर आसानी से पास हो जाता है (7)
  • दवाएं : दवाओं का सेवन बीमारी से निजात पाने के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ दवाओं का सेवन कब्ज की बीमारी का कारण भी बन सकता है। कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स और दर्द निवारक दवाएं कब्ज का कारण बन सकती हैं (8)। इसलिए, दवाइयों को भी लैट्रिन नहीं आने का कारण माना जा सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान : गर्भवती महिलाओं को अक्सर कब्ज का सामना करना पड़ता है। इस दौरान प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का स्तर ज्यादा और मोटीलिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसी कारण पेट से गुदा मार्ग तक मल आने में लगने वाला टाइम (बाउल ट्रांजिट टाइम) बढ़ सकता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त आयरन का सेवन करती हैं, जिसके कारण से भी कब्ज हो सकता है। इस दौरान बढ़ा हुआ गर्भाशय भी मल को बाहर निकलने से रोक सकता है (9)
  • हाइपोथायरायडिज्म : हाइपोथायरायडिज्म का एक लक्षण कब्ज भी है। हाइपोथायरायडिज्म शरीर में हार्मोन असंतुलन के लिए जिम्मेदार है। यह असंतुलन कब्ज की बीमारी का कारण बन सकता है (10)
  • शारीरिक श्रम की कमी : शारीरिक श्रम न करना या कोई व्यायाम न करना भी कब्ज का कारण बन सकता है। पेट की मांसपेशियों के मजबूत होने से मलत्याग करना सुविधाजनक हो सकता है। शारीरिक श्रम के अभाव में पेट की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं और कब्ज का कारण बन सकती हैं (11)
  • हेल्थ सप्लीमेंट्स : ये भी कब्ज का कारण बन सकते हैं। मुख्य रूप से आयरन और कैल्शियम के सप्लीमेंट कब्ज का कारण बन सकते हैं (11)
  • तनाव : तनाव कई मायनों में कब्ज पैदा कर सकता है। तनाव के दौरान निकलने वाले हार्मोन आंत में संक्रमण का कारण बन सकते हैं और मल त्याग को बाधित कर सकते हैं। इसके अलावा, तनाव के दौरान व्यक्ति उचित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन नहीं करता और व्यायाम भी नहीं करता, जिस कारण कब्ज हो सकता है (12)
  • मल की इच्छा को रोकना : मल को रोके रखने से कब्ज की बीमारी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि मल को रोके रखने से पेट और आंत धीरे-धीरे मल त्याग का सिग्नल देना बंद कर सकते हैं (11)
  • आईबीएस : इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) पेट से जुड़ी ऐसी समस्या है, जिसमें पेट में दर्द या बेचैनी रह सकती है साथ ही 3 महीने या उससे अधिक समय के लिए मल त्याग की आदतों में बदलाव (जैसे दस्त या कब्ज) हो सकता है। इसलिए, इसके कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है (13)
  • अपर्याप्त नींद : इस भागदौड़ भरे जीवन में काम का इतना दबाव है कि व्यक्ति भरपूर नींद नहीं सो पाता हैं। पर्याप्त नींद न लेने के कारण पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता और कब्ज की समस्या हो सकती है (14)

अधिक जानकारी आगे है

अब जानते हैं कि किन परिस्थितियों में माना जाता है कि व्यक्ति को कब्ज की समस्या है।

कब्ज के लक्षण – Symptoms of Constipation in Hindi

कब्ज की बीमारी के लक्षण इसकी गंभीरता के अनुसार नजर आ सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में कब्ज के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। एक व्यक्ति में कब्ज के एक या एक से अधिक लक्षण देखे जा सकते हैं, जो इस प्रकार हैं (15) :

  • सामान्य से कम बार मल त्याग करना।
  • कठोर व सूखा मल, जो बाहर निकलते समय दर्द कर सकता है।
  • मल त्याग करने में अधिक जोर लगाने की जरूरत।
  • लंबे समय तक शौचालय में बैठना।
  • शौच के बाद लगना कि पेट साफ नहीं हुआ।
  • पुरानी कब्ज के लक्षण में से एक पेट में मरोड़ उठना या दर्द होना भी है।
  • पेट में मरोड़ उठना या दर्द होना।
  • मुंह में छाले होना।

बने रहें हमारे साथ

आइए, अब जानते हैं कि कब्ज के लिए कौन-कौन से घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं।

कब्ज का घरेलू इलाज – Home Remedies for Constipation in Hindi

कब्ज कैसे दूर करें, इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। इसे ठीक करने के लिए कब्ज का घरेलू इलाज किया जा सकता है, जिनके प्रयोग से कब्ज से बचाव हो सकता है। आइए, जानते हैं कि ये कैसे कब्ज का रामबाण इलाज साबित हो सकते हैं।

1. पानी

सामग्री :

  • एक गुनगुना गिलास पानी
  • आधा चम्मच नींबू का रस
  • एक चम्मच शहद

प्रयोग की विधि :

  • गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाएं।
  • अब एक जगह बैठ जाएं और जितना हो सके पानी को घूंट-घूंट करके पिएं।
  • इसके बाद खुली जगह पर 15-20 मिनट टहलना शुरू करें।
  • कुछ देर में मल त्याग की इच्छा हो सकती है।

कैसे मदद करता है?

सुबह सोकर उठने के बाद शहद के साथ नींबू पानी का सेवन लाभकारी हो सकता है। इस बारे में एक शोध से जानकारी मिलती है कि सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीने से कब्ज की समस्या से राहत मिल सकती है (16)। ऐसे में अगर कोई कब्ज का रामबाण इलाज खोज रहा है, तो इस घरेलू उपचार को अपनाया जा सकता है।

2. अरंडी का तेल

सामग्री :

  • एक चम्मच अरंडी का तेल
  • आधा नींबू का रस
  • एक गिलास पानी

प्रयोग की विधि :

  • एक गिलास पानी को गुनगुना करें।
  • इसमें नींबू और अरंडी का तेल मिला लें।
  • इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट करें।

कैसे मदद करता है?

अरंडी का तेल कब्ज का घरेलू इलाज माना जा सकता है। जब इसे खाली पेट लिया जाता है, तो यह तेल चमत्कारी तरीके से काम करता है। यह पेट में जाकर मल को पतला व मुलायम कर सकता है, जिस कारण कुछ समय बाद शौच के समय पेट पूरी तरह साफ हो सकता है (17)।

नोट : डॉक्टर से सलाह लिए बिना इस तेल को सात दिन से ज्यादा नहीं लेना चाहिए।

3. पपीता

सामग्री :

  • एक कटोरी पपीता
  • एक कप डेरी फ्री कोकोनट योगर्ट

प्रयोग की विधि :

  • एक कटोरी पपीता और एक कप डेरी फ्री कोकोनट योगर्ट को मिक्सी में डालकर शेक बनाएं।
  • अब गिलास में डालकर इसका सेवन करें।

कैसे मदद करता है?

यह आंतों के लिए ल्यूब्रिकेट का काम करता है यानी मल को मुलायम कर पेट को साफ कर सकता है। पपीते को कब्ज का रामबाण इलाज माना जा सकता है, क्योंकि इसके रस में पपाइन नामक तत्व होता है, जो भोजन को पचा सकता है। यह गुणकारी फल शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है (18) (19)। इसी वजह से पपीता को मल को मुलायम करने के उपाय में से एक माना जाता है।

4. अलसी के बीज

सामग्री :

  • अलसी के बीज
  • एक गिलास पानी

प्रयोग की विधि :

  • अलसी के बीजों को मिक्सी में डालकर पाउडर बना लें।
  • 20 ग्राम अलसी पाउडर को पानी में डालकर मिक्स करके रख दें।
  • तीन-चार घंटे बाद पानी को छानकर पी जाएं।

कैसे मदद करता है?

अलसी को कब्ज की आयुर्वेदिक दवा माना गया है। इसमें में सॉल्युबल फाइबर पाया जाता है, जो आंतों को साफ कर कब्ज का उपचार करने में कारगर हो सकता है। इसमें फाइबर ज्यादा और कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जिस कारण यह पाचन तंत्र को दुरुस्त कर खाने को हजम करने में मदद कर सकता है। अलसी में कई एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर में हार्मोन को नियंत्रित रखते हैं। इस लिहाज से हम कह सकते हैं कि अलसी कब्ज के लिए उपयोगी हो सकती है (20)।

आगे हैं और नुस्खे

5. बेकिंग सोडा

सामग्री :

  • एक चम्मच बेकिंग सोडा
  • एक गिलास गुनगुना पानी

प्रयोग की विधि :

  • पानी में बेकिंग सोडा मिलाएं और पी जाएं।
  • प्रेशर बनने की प्रतीक्षा करें।

कैसे मदद करता है?

कब्ज की दवा के रूप में बेकिंग सोडा यानी सोडियम बाइकार्बोनेट कारगर, गुणकारी व सस्ता उपाय साबित हो सकता है। सोडियम बाइकार्बोनेट एक एंटी एसिड तत्व है, जिसका उपयोग सीने में जलन और एसिड के कारण हुई  अपच से राहत देने के लिए किया जा सकता है। पाचन तंत्र से जुड़े ये फायदे कब्ज के जोखिम को कम कर सकते हैं। बेकिंग सोडा का प्रयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि इसका अधिक सेवन हानिकारक भी हो सकता है (21)।

6. शहद

सामग्री :

  • एक चम्मच शहद
  • आधा नींबू
  • एक गिलास गुनगुना पानी

प्रयोग की विधि :

  • गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाएं।
  • फिर इस मिश्रण को पी लें।

कैसे मदद करता है?

शहद को प्राकृतिक व गुणकारी माना गया है और यह कब्ज का घरेलू इलाज हो सकता है। भारत में प्राचीन काल से इसका उपयोग दवा के तौर पर किया जा रहा है। अगर कोई सोच रहा है कि कब्ज कैसे दूर करें, तो इसके लिए आयुर्वेद में भी शहद के लाभ बताए गए हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कब्ज से बचाव में उपयोगी साबित हो सकते हैं (22)।

7. आलू बुखारे का जूस

सामग्री 

  • दो आलू बुखारे

प्रयोग की विधि :

  • नियमित रूप से आलू बुखारे का सेवन करें।

कैसे मदद करता है?

आलू बुखारा कब्ज का उपचार कर सकता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट के लिए लाभकारी हो सकता है। यह मल की मात्रा को बढ़ाकर पेट साफ करता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में आलू बुखारे को कब्ज के लिए फायदेमंद माना गया है (23)।

अधिक जानकारी आगे है

8. त्रिफला

सामग्री :

  • दो चम्मच त्रिफला चूर्ण
  • एक गिलास गुनगुना पानी

प्रयोग की विधि :

  • त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी में मिला लें।
  • रात को सोने से पहले इसे पी लें।
  • इसे पीने के बाद कुछ न खाएं।

कैसे मदद करता है?

आंवला, हरड़ व बहेड़ा नामक तीन फलों को समान मात्रा में मिलाकर त्रिफला चूर्ण बनाया जाता है। यह कब्ज को ठीक करने की बेहद पुरानी आयुर्वेदिक औषधि है। त्रिफला पेट को साफ कर सकता है और पेट फूलना व सूजन जैसे लक्षणों से राहत दे सकता है (24)। इसलिए त्रिफला को कब्ज का रामबाण इलाज माना जा सकता है।

9. हर्बल-टी

सामग्री :

  • हर्बल-टी बैग
  • गरम पानी

प्रयोग की विधि : :

  • हर्बल टी बैग को गरम पानी से भरे कप में डालें।
  • पांच मिनट बाद इसे पी जाएं।

कैसे मदद करता है?

हर्बल-टी को प्राकृतिक लैक्सटिव (पेट साफ करने की दवा) माना गया है। इसके सेवन से मल त्याग करने में आसानी होती है (25)। बाजार में कई हर्बल टी मौजूद हैं, जिन्हें कब्ज का उपचार करने के लिए स्वादानुसार चुना जा सकता है।

कब्ज कैसे दूर करें यह जानने के लिए और उपाय भी हैं, जिन्हें आप नीचे पढ़ सकते हैं।

10. विटामिन

सामग्री :

  • विटामिन-सी टैबलेट
  • विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल

कैसे करें प्रयोग :

  • विटामिन-सी टैबलेट को एक गिलास पानी में मिलाकर पी जाएं।
  • इसी मिश्रण के साथ विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल भी ले सकते हैं।

कैसे मदद करता है?

विटामिन-सी का प्रयोग कब्ज के लक्षणों को कम कर सकता है। कब्ज की दवा के रूप में विटामिन-सी का प्रयोग भोजन नली को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित कर सकता है। विटामिन-सी शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद कर सकता है। वहीं, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल में बी-1, बी-5, बी-9 और बी-12 जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पेट को साफ करने में उपयोगी हो सकते हैं (26) (27)। इसी वजह से इसे मल को मुलायम करने की दवा भी माना जाता है।

11. कीवी

सामग्री :

  • दो कीवी
  • काला नमक

प्रयोग की विधि :

  • किवी को छीलकर टुकड़ों में काट लें।
  • कीवी फल में काला नमक लगाकर खाएं।

कैसे मदद करता है?

कब्ज का इलाज करने में कीवी मददगार हो सकती है। कीवी का सेवन आईबीएस के लक्षणों में कमी ला सकता  है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कीवी का सेवन करने से मल त्याग में लगने वाले समय को कम किया जा सकता है, यानी मल त्याग करना सुविधाजनक हो सकता है (28)।

12. अंजीर

सामग्री :

  • सूखे अंजीर

प्रयोग की विधि :

  • अंजीर को रात भर पानी में भिगो कर रखें।
  • सुबह खाली पेट अंजीर का सेवन करें।
  • चाहें, तो इसका पेस्ट भी बना सकते हैं।

कैसे मदद करता है?

अंजीर को कब्ज के मरीजों के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है। इसके बीज मल को मुलायम कर सकते हैं, ताकि वो मल द्वार के जरिए आसानी से बाहर निकल सके। इस बारे में एनसीबीआई की वेबसाइट पर एक शोध प्रकाशित है। जिसमें बताया गया है कि अंजीर का पेस्ट कब्ज के उपचार में मददगार साबित हो सकता है। इसके पीछे का कारण है इसमें मौजूद फाइबर, जो मल निकासी की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकता है (29)। यही कारण है कि कब्ज की दवा के रूप में अंजीर का सेवन लाभकारी माना जा सकता है।

13. जैतून का तेल

सामग्री :

  • दो चम्मच जैतून का तेल

प्रयोग की विधि :

  • रोज सुबह खाली पेट जैतून का तेल पिया जा सकता है।
  • खाना बनाने में भी इस तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे मदद करता है?

जैतून का तेल कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज है। यह तेल मल को मुलायम करता है, जिससे मल त्याग करते समय जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और पेट आसानी से साफ हो सकता है (30)।

14. गेहूं का चोकर

सामग्री :

  • आटे से निकाला गया या बाजार से खरीदा गया चोकर
  • पानी

प्रयोग की विधि :

  • चोकर को पानी के साथ मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें।
  • 20 ग्राम पाउडर को पानी में घोल कर रोजाना सेवन करें।
  • चाहें, तो साबुत चोकर को दैनिक आहार में भी शामिल कर सकते हैं।
  • इसे रोटी, दलिया और हलवे इत्यादि में मिलाया जा सकता है।
  • बाजार में मिलने वाली जिन ब्रेड और बिस्कुट में चोकर होता है, उनका सेवन किया जा सकता है।

कैसे मदद करता हैं?

वैज्ञानिक अध्ययन इस बात का पुख्ता प्रमाण देते हैं कि कब्ज की रोकथाम के लिए फाइबर युक्त गेहूं का चोकर मददगार हो सकता है। चोकर मनुष्य के लिए एक वरदान है, क्योंकि गेहूं का चोकर मोटापा और कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों से बचाव में सहायक है। साथ ही ये डायवर्टिकुलर रोग (एक पाचन तंत्र विकार), कब्ज और आईबीएस सहित पेट की कई बीमारियों की रोकथाम कर सकता है (31)। इसलिए, चोकर को कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज माना जा सकता है।

15. सेब

सामग्री :

  • एक सेब
  • एक गिलास दूध

प्रयोग की विधि :

  • सेब को छिलके समेत बारीक टुकड़ों में काट लें।
  • इन्हें मिक्सी में डालकर दूध के साथ पीस लें।
  • इस शेक को नाश्ते में शामिल करें।
  • रोजाना एक सेब का सेवन करना शेक से भी ज्यादा फायदेमंद है।

कैसे मदद करता है?

सेब को छिलके सहित खाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलता है, जो कब्ज के लिए लाभकारी हो सकता है। इसलिए, सेब को कब्ज के लिए अच्छे माने जाने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है (7)

और पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें

16. खट्टे फल या सिट्रस फ्रूट

सामग्री :

  • संतरा
  • मौसंबी
  • नींबू
  • चकोतरा

प्रयोग की विधि :

  • इन सभी फलों का नियमित रूप से सेवन करें।

कैसे मदद करता है?

आम धारणा है कि खट्टे फल खाने से कब्ज होता है, जबकि ऐसा नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि खट्टे फलों में पेक्टिन नामक कंपाउंड पाया जाता है, जो कब्ज का देसी इलाज हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध एक अध्ययन के अनुसार, कब्ज को नियंत्रित करने में पेक्टिन सहायक हो सकता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि खट्टे फल कब्ज के उपचार में उपयोगी हो सकते हैं (32)।

17. दालें

सामग्री :

  • किडनी बीन्स (राजमा)
  • छोले
  • सोयाबीन
  • अन्य दालें

प्रयोग की विधि :

  • उपरोक्त में रोजाना किसी एक दाल को पका कर दोपहर या रात के भोजन में शामिल किया जा सकता है।

कैसे मदद करता है?

दालों में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, इसलिए यह कब्ज से राहत दे सकता है। साथ ही इनका सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि अधिक फाइबर का सेवन करना गैस और पेट दर्द का कारण बन सकता है (33) (34) ।

अभी बाकी है जानकारी

लेख के इस हिस्से में जानेंगे कब्ज में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए।

कब्ज में क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Constipation in Hindi

अगर खानपान संतुलित रहेगा, तो किसी भी तरह के रोग का जोखिम नहीं हो सकता है। इसलिए, जरूरी है कि जो भी वह खाएं साफ और स्वच्छ होना चाहिए। चलिए, अब बताते हैं कि कब्ज न हो उसके लिए किन-किन चीजों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए (6)(7)।

ये खाएं :

फलियां : अन्य सब्जियों के मुकाबले इसमें अधिक मात्रा में फाइबर होता है। इसे आप या तो सूप में डालकर खा सकते हैं या फिर इसकी सलाद भी बना सकते हैं। फलियों की सब्जी भी बन सकती है। पेट साफ न होने के लक्षण दिखाई देने पर इनका सेवन बढ़ा देना फायदेमंद हो सकता है।

फल : वैसे तो फल खाना हर तरह से लाभकारी है, लेकिन पपीता, सेब, केला व अंगुर ऐसे फल हैं, जो कब्ज में लाभदायक हो सकते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को साफ करने में मदद कर सकते हैं। डायबिटीज के मरीज इन फलों का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

सूखे मेवे : किशमिश, अखरोट, अंजीर व बादाम जैसे सूखे मेवों में अधिक फाइबर होता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से कब्ज से बचाव हो सकता है।

पॉपकॉर्न : पॉपकॉर्न को फाइबर और कैलोरी का स्रोत माना जाता है। पॉपकॉर्न को स्नैक्स के तौर पर खाने से कब्ज से राहत मिल सकती है। इसके लिए फ्लेवर पॉपकॉर्न की जगह प्लेन पॉपकॉर्न का इस्तेमाल ज्यादा बेहतर हो सकता है।

ओटमील : ओट्स में वसा कम मात्रा में होती है, जबकि बीटा ग्लूकॉन नाम विशेष प्रकार का फाइबर होता है। इसके अलावा, ओट्स में आयरन, प्रोटीन व विटामिन-बी1 भी पाया जाता है।

लिक्विड पदार्थ : अगर चाहते हैं कि कब्ज की समस्या हमेशा दूर रहे, तो अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। दिनभर में कम से कम आठ-दस गिलास पानी तो जरूर पीना ही चाहिए। इसके अलावा, विभिन्न तरह के फलों व सब्जियों का जूस पिया जा सकता है। इससे आंतों को भोजन पचाने में दिक्कत नहीं आती और शरीर हमेशा हाइड्रेट रह सकता है।

कब्ज के लिए नुकसान पदार्थ

कब्ज के नुकसान के लिए कुछ खाद्य पदार्थ जिम्मेदार हो सकते हैं, इन खाद्य पदार्थ में ये शामिल हैं:

तले हुए खाद्य पदार्थ : चिप्स व चाट-पकौड़ी जैसी चीजें खाने से पेट का हाजमा खराब हो सकता है और कब्ज की शिकायत हो सकती है।

शक्कर युक्त पेय पदार्थ : कोल्ड ड्रिक्स या फिर चीनी से बने शरबत पेट को खराब कर सकते हैं।

चाय-कॉफी : जिन्हें कब्ज हो, उन्हें चाय व कॉफी से भी परहेज करना चाहिए।

जंक फूड : पास्ता, बर्गर, पिज्जा या फिर माइक्रोवेव में बने खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। पेट साफ न होने के लक्षण दिखाई दें, तो भोजन पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।

शराब व धूम्रपान : धूम्रपान करने से पाचन तंत्र खराब हो जाता है। धूम्रपान का सीधा असर छोटी व बड़ी आंत पर पड़ता है, जिस कारण कब्ज हो सकती है (35)। वहीं, शराब जैसे अल्कोहल युक्त पेय पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनका अधिक सेवन पेट खाली होने में लगने वाले समय में इजाफा कर सकता है (36)।

आगे हैं रोचक जानकारी

आइए, जानते हैं कि घरेलू नुस्खों से पुरानी से पुरानी कब्ज का इलाज हो सकता है या नहीं।

क्या इन घरेलू नुस्खों से पुरानी से पुरानी कब्ज का इलाज हो सकता है?

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन की मानें, तो फाइबर युक्त आहार पुरानी कब्ज के लक्षणों में सुधार ला सकता है, लेकिन केवल आहार और घरेलू तरीके इसका पूरा इलाज नहीं कर सकते। अगर कब्ज पुरानी है और उपरोक्त घरेलू नुस्खों को अपनाने के बाद भी मल त्याग में कठिनाई हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा। डॉक्टर पुरानी कब्ज के इलाज के लिए दवाओं और एनिमा का प्रयोग सुझा सकते हैं। इससे कब्ज और कब्ज से होने वाले रोग से बचा सकता है।

लेख को अंत तक पढ़ें

आइए, अब जानते हैं कि कौन-कौन से योग किए जाएं, जिससे इस समस्या को कम किया जा सके।

कब्ज के लिए योगासन – Yoga for Constipation in Hindi

योगासन करना भी कब्ज से राहत दे सकता है। आइए, जानते हैं कि कब्ज के लिए कौन-कौन से योगासन करना उचित है (37)।

  1. मयूरासन : जिन्हें कब्ज है, उनके लिए मयूरासन बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे पाचन क्रिया ठीक होती है और गैस, कब्ज व पेट में दर्द जैसी समस्या दूर होती हैं।

Shutterstock

मयूरासन करने की प्रक्रिया :

  • घुटनों के बल बैठ जाएं और आगे की तरफ झुक जाएं।
  • हथेलियों को एक साथ जमीन पर सटाते हुए दोनों कोहनियों को नाभी पर टिकाएं और संतुलन बनाते हुए घुटनों को सीधा करने की कोशिश करें।
  • इस आसन को एक बार में करना कठिन है, लेकिन नियमित अभ्यास से इसे किया जा सकता है।

सावधानी : जिन्हें उच्च रक्तचाप, टीबी या फिर हृदय संबंधी कोई बीमारी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

  1. अर्ध मत्स्येंद्रासन : इस आसन को करने से भी कब्ज में राहत मिल सकती है।

Shutterstock

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • अब दाएं पैर को मोड़कर बाएं तरफ ले जाएं और एड़ी को कूल्हे से स्पर्श करने का प्रयास करें। वहीं, बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर के ऊपर से ले जाते हुए तलवे को जमीन से सटा लें।
  • अब दाएं हाथ को जांघ व पेट के बीच में से ले जाते हुए बाएं पैर को छूने की कोशिश करें और बाएं हाथ को पीछे की ओर ले जाएं (जैसा फोटो में दर्शाया गया है)।
  • इसके बाद कमर, कंधों व गर्दन को बाईं ओर मोड़ते हुए बाहिने कंधे के ऊपर से देखने की कोशिश करें।
  • इस दौरान, लंबी व गहरी सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए दाएं हाथ, कमर, गर्दन व छाती को ढीला छोड़ते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं और दूसरी तरफ से इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

सावधानी : गर्भवती महिलाओं और जिन्हें रीढ़ की हड्डी, गर्दन व कमर में दर्द हो या फिर एसिडिटी की परेशानी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

  1. हलासन : यह कब्ज ठीक करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करता है।

Shutterstock

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और पैरों व हाथों को सीधा रखें।
  • अब पैरों को धीरे-धीरे 90 डिग्री तक उठाने की कोशिश करें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए कमर को ऊपर उठाएं और पैरों को पीछे ले जाते हुए अंगूठों को जमीन से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और सामान्य गति से सांस लेते हैं। फिर ,सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  1. पवनमुक्तासन : यह लीवर को मजबूत कर पाचन तंत्र को ठीक करता है और कब्ज, गैस व एसिडिटी से राहत देता है। इसलिए इसके अभ्यास से कब्ज से होने वाले रोग से बचा जा सकता है।

Shutterstock

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। पहले दाहिने पैर को घुटने से मोड़ें और दोनों हाथों को आपस में जोड़ते हुए घुटने को पकड़ लें।
  • अब सांस लेते हुए घुटने को छाती से लगाने की कोशिश करें और फिर सांस छोड़ते हुए गर्दन उठाते हुए नाक को घुटने से लगाने का प्रयास करें।
  • कुछ सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं और इस तरह से सांस लें कि पेट पूरा फूल जाए और सांस छोड़ें तो पेट पूरा अंदर चला जाए।
  • यह प्रक्रिया बाएं पैर से और फिर दोनों पैरों के साथ करें।

सावधानी : जिसे कमर या घुटनों में दर्द हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही सुबह खाली पेट या फिर भोजन करने के पांच घंटे बाद इस आसन को करें।

5. तितली मुद्रा : पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए यह आसन सबसे उपयुक्त व आसान है।

Shutterstock

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर बैठ जाएं और दोनों घुटनों को मोड़ते हुए तलवों को आपस में मिलाएं।
  • तलवों को दोनों हाथों से पकड़ लें और जितना हो सके शरीर के पास ले आए।
  • इसके बाद दोनों घुटनों को आराम-आराम से ऊपर-नीचे करें।
  • कोशिश करें कि जब घुटने नीचे जाएं, तो वह जमीन को स्पर्श करें।

सावधानी : अगर घुटनों में चोट लगी हो या दर्द हो, तो यह आसन न करें।

नोट: शुरुआत में ये सभी आसन ट्रेनर की देखरेख में ही करें। नीचे हम कब्ज से बचाव के लिए कुछ जरूरी टिप्स दे रहे हैं।

अभी जानकारी बाकी है

कब्ज का उचित इलाज न मिलने पर उसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, आइए जानते हैं।

कब्ज होने से नुकसान – Side Effects Constipation in Hindi

कब्ज को अनदेखा करना कुछ गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इन समस्याओं में कब्ज से होने वाली बीमारियां शामिल हैं।

  • लगातार कब्ज रहना बवासीर की समस्या को जन्म दे सकता है (38)।
  • कब्ज के कारण पेट साफ न होने से मुहांसों की समस्या भी हो सकती है (39)।
  • लगातार कब्ज बना रहना पुरुषों में वैरिकोसील (नसों की खराबी का रोग) रोग का कारण बन सकता है। यह समस्या पुरुषों की प्रजनन क्षमता में कमी ला सकती है (40)।
  • पुराने कब्ज के मरीजों को कुछ मानसिक विकार भी हो सकते हैं, जिसमें चिंता, तनाव और अवसाद शामिल है (41)।

आइए, अब जानते हैं कि कब्ज से बचाव किस तरह किया जा सकता है।

कब्ज से बचाव – Prevention Tips For Constipation in Hindi

यहां हम कुछ काम की बातें बता रहे हैं, जिन्हें दिनचर्या में शामिल करने से यह कब्ज की समस्या से बचा जा सकता है।

अनुशासित दिनचर्या : सुबह तय समय पर उठें और रात को तय समय पर सोएं। साथ ही तीनों टाइम के खाने में चार-चार घंटे का अंतर रखें और हल्का खाएं। इस अभ्यास से कब्ज से होने वाली बीमारी से बचा जा सकता है।

जब यात्रा पर हों : यात्रा के दौरान भी नियमानुसार ही भोजन करें और संभव हो, तो हल्का व साफ-सुथरा ही खाएं।

समय पर शौच : जैसा कि इस लेख में पहले बताया गया है कि मल को रोककर रखने से भी पाचन तंत्र खराब होता है और कब्ज की समस्या होती है। इसलिए, जब जरूरत महसूस हो, तभी तुरंत मल त्याग करें।

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ : अपने भोजन में ओट्स, ब्राउन राइस, फल व सब्जियों को शामिल करें, ताकि पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिल सके।

नियमित व्यायाम : ज्यादा देर तक बैठकर काम करने से भी कब्ज की समस्या हो सकती है। इसलिए, व्यस्त जीवन में कुछ समय निकालकर व्यायाम करें या फिर जिम जा सकते हैं। अगर खेलकूद में रुचि है, तो क्रिकेट, बैडमिंटन, लॉन टेनिस व फुटबॉल खेल सकते हैं। साइकलिंग व स्विमिंग भी अच्छा विकल्प हो सकता है।

बेड-टी को न : सुबह उठते ही बेड-टी की जगह पानी पीने की आदत डालें। सुबह चाय या कॉफी की जगह गुनगुना पानी ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि कई बीमारियों की जड़ कब्ज है और आजकल ज्यादातर लोग इससे परेशान है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया जाए, तो यह पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, जरूरी है कि यहां बताए गए घरेलू नुस्खों व सलाह का पालन कर इस बीमारी से बचाव का प्रयास करें। अच्छा खान-पान और अनुशासित दिनचर्या अपनाएं। स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए आप स्टाइलक्रेज के अन्य आर्टिकल भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कब्ज बार-बार क्यों होता है?

कब्ज बार-बार होने के कारण हैं – दिनचर्या में बदलाव, दैनिक आहार में पर्याप्त फाइबर न होना, पर्याप्त तरल पदार्थ न पीना और व्यायाम न करना। इन सारे कारणों के होने से कब्ज बार-बार हो सकता है। इसलिए, कब्ज से बचने के लिए खान-पान की एक नियमित दिनचर्या बनाना जरूरी है (15)

कब्ज के कुछ तुरंत उपाय क्या हैं?

एनिमा का इस्तेमाल करना इसका तुरंत उपाय हो सकता है। इसमें गुदा मार्ग से साबुन जैसे चिकने द्रव को पेट में पहुंचाया जाता है। इसके कुछ देर बाद ही मल त्याग की इच्छा होने लगती है। यह विधि नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं की जाती, क्योंकि इसके कई नुकसान हो सकते हैं। डॉक्टर भी इसके इस्तेमाल की सलाह गंभीर मामलों में देते हैं। इसलिए, कब्ज से राहत में डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा और खान-पान में सुधार ही विश्वसनीय हैं (42)।

 

Sources

Articles on StyleCraze are backed by verified information from peer-reviewed and academic research papers, reputed organizations, research institutions, and medical associations to ensure accuracy and relevance. Read our editorial policy to learn more.

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Health News

Cooking Tips: don’t throw away if curd is sour, make these 5 delicious things, and learn 5 ways to use Sour Curd

Published

on

By

Cooking Tips: don’t throw away if curd is sour, make these 5 delicious things, and learn 5 ways to use Sour Curd

Ways to Use Sour Curd: next time the curd turns sour, just gather some common kitchen ingredients and start making these delicious recipes.

Sour Curd Uses: have some leftover curd at home or you forgot to remove the curd on time and now it is sour, then you can use it to make some delicious recipes. Yogurt is rich in probiotics and is usable and healthy even if it is sour. Recipes like idli, kadhi and dhokla need curd to be sour to give a distinctive flavour and texture. So, the next time the curd turns sour, just gather some common kitchen ingredients and fetch these delicious recipes.
Make these Dishes with Sour Curd

Cooking Tips: दही खट्टी हो जाए तो फेंकें नहीं, बनाएं ये 5 स्वादिष्ट चीजें, जानें Sour Curd का इस्तेमाल करने के 5 तरीके

1) cheela
Cheela is an ideal dish that you can take for breakfast, lunch or dinner. It is one of the most favorite dishes of Weight Watchers as it is delicious as well as healthy. You can make cheela with gram flour, semolina, moong dal, jowar flour or any other flavor of your choice. When preparing the batter, just add a handful of onions, tomatoes and bell peppers to the batter. Make a curd batter to make the chiles soft. You can also make plain chiles and later add the stuffing of fried vegetables or paneer.

2) dhokla
Dhokla batter is made to give a spongy texture to the curd. The combination of besan with sour curd will give the dhokla its unique ‘sour’ taste. Prepare batter by mixing gram flour and curd in a 2:1 ratio. Add salt and water as needed to prepare the final solution. Steam the dhokla add the tempering of your choice and enjoy with tamarind chutney.

cv1mgl58
3) dosa
If you want to make a classic South Indian style dosa, all you need is rice, fenugreek seeds and curd. This recipe will give the dosa a piquant taste and also help in giving a nice texture. First, soak the rice and fenugreek grains in the curd for 3 hours. Then mix them together to make batter. Now add a little more curd and beat the batter well and let it rest for 6 hours. Adjust the consistency and flavor by adding water and salt. Now your dosa batter is ready. Make crunchy using this easy-to-make batter.

4) idli
A classic South Indian breakfast dish, idli is the perfect way to start your day. You can easily use the prepared batter for idli as you just need to mix it with curd and water to prepare the batter. The sour curd gives the idli a unique flavour and also makes it fluffy. You can combine idli with sambar or coconut chutney to make a nutritious meal.

5) Curry
Kadhi is a popular dish that is made in many ways all over India, but curd is an important ingredient. The unique feature of Kadhi is its sour taste which it gets from sour curd. Kadhi can be made with besan or moong dal flour, both of which taste equally wonderful. You can serve Kadhi with chapati, but it tastes best when combined with rice.

1. A natural food product made by boiling milk until curd forms.
2. The name given to the white solid material formed by separating milk serum (casein) from water-soluble components.
3. Any substance having the consistency of cottage cheese. Used mainly in cooking.
4. Curdle means “to coagulate”
5. In medicine, a thickening agent employed chiefly in poultices.
6. A soft mass resembling cottage cheese.
7. The liquid produced by boiling milk; also called whey.
8. The dried residue remaining after cream has been skimmed off the top of a vat of milk.
9. An acidulous fluid secreted by certain glands, esp. those of the perineum and mammary gland; sometimes, pus.
10. A milky fluid exuded by certain animals, esp. goats.
11. A cheesy liquid obtained from milk by coagulation, esp. in making cottage cheese.
12. Cow’s milk curds.
13. Milk curdled with rennet.
14. Cheese curdled with vinegar or acid.

DISCLAIMER: This content provides general information only, including advice. It is by no means a substitute for qualified medical opinion. Always consult a specialist or your doctor for more information. Healthnutrial does not claim responsibility for this information.

Continue Reading

Health News

सेहत का खजाना है सूखी लाल मिर्च, आंख और हार्ट के लिए है फायदेमंद

Published

on

By

सूखी लाल मिर्च है सेहत का खजाना, आंखों और दिल के लिए है फायदेमंद
भारतीय घरों में खाने में लाल मिर्च का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। लाल मिर्च खाने का रंग और स्वाद बढ़ाने का काम करती है।

लाल मिर्च Red Chili पाउडर स्वास्थ्य लाभ: भारतीय घरों में खाना बनाते समय कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं मसालों में से एक है सूखी लाल मिर्च। लाल मिर्च न सिर्फ खाने के रंग को खूबसूरत बनाती है, बल्कि तीखा स्वाद देने का भी काम करती है। दाल हो या कोई भी सब्जी, बिना लाल मिर्च के खाने का स्वाद फीका सा लगता है. लाल मिर्च विटामिन ए, सी और ई से भरपूर होती है, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है। हालांकि आज भी ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि लाल मिर्च का सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि अगर सीमित मात्रा में लाल मिर्च का सेवन किया जाए तो सेहत को काफी फायदा मिल सकता है। तो आज हम आपको लाल मिर्च के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

Chili, Pepper, Red, Food, Spice, Hot

लाल_मिर्च_फॉर_वेट_लॉस

वजन घटाने में मददगार Red Chili
एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की एक रिपोर्ट के मुताबिक लाल मिर्च में मोटापा रोधी गुण होते हैं, जो मोटापे या वजन बढ़ने के कारकों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। लाल मिर्च के नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और यह शरीर की चर्बी को कम करने में मददगार साबित होता है।

दिन में गलती न करें, कमजोरी महसूस न करें।

आंखों के लिए फायदेमंद
सूखी लाल मिर्च में विटामिन ए पाया जाता है, जो आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। सूखी लाल मिर्च का नियमित रूप से सेवन करने से रेटिना की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा सूखी लाल मिर्च लगातार स्क्रीन देखने से होने वाली आंखों की परेशानी से आंखों को बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

मिर्च_स्वास्थ्य_लाभ

गठिया के मरीजों के लिए फायदेमंद Red Chili
सूखी लाल मिर्च में ‘कैप्साइसिन’ नामक तत्व पाया जाता है। गठिया के मरीजों के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। जिन लोगों को जोड़ों या कमर में दर्द और पैरों में सूजन है, उन्हें भी लाल मिर्च का सेवन करने की सलाह दी जाती है। Capsaicin मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द और पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द को कम करता है। दरअसल, किसी भी तरह के शारीरिक दर्द में डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली ज्यादातर दवाओं में कैप्साइसिन का इस्तेमाल होता है, इसलिए दर्द से राहत पाने के लिए सूखी लाल मिर्च खाने की सलाह दी जाती है।

इम्युनिटी बूस्टर
कोरोना महामारी के बाद मजबूत इम्युनिटी बनाए रखना कितना जरूरी है, यह तो सभी जानते हैं। सूखी लाल मिर्च में भरपूर मात्रा में विटामिन ए और सी होता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सूखी मिर्च के पोषक तत्व आंत, फेफड़े और मूत्र मार्ग में संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद करने के लिए जाने जाते हैं।

 

Red Chili  लाल मिर्च सेहत का खजाना है, लेकिन इसमें पाया जाने वाला कैप्साइसिन कभी-कभी गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

 

लाल मिर्च एक ऐसा भोजन है जिसकी उत्पत्ति मेक्सिको में हुई थी। आज, यह आमतौर पर दुनिया भर में आनंद लिया जाता है। लाल मिर्च मिर्च की खेती प्रागैतिहासिक काल से की जाती रही है। उनके उपयोग का सबसे पहला ज्ञात प्रमाण 5000 ईसा पूर्व का है। हाल ही में वे शाकाहारियों के साथ-साथ मांसाहारी लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हो गए हैं। टमाटर में लाल रंग एंथोसायनिन पिगमेंट से आता है। ये यौगिक ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, प्लम, बैंगन, बैंगनी आलू और कई फूलों में चमकीले रंगों के लिए भी जिम्मेदार हैं। अंगूर की त्वचा और वाइन में एंथोसायनिन भी पाए जाते हैं। स्वादिष्ट होने के अलावा, ये खाद्य पदार्थ एंटीऑक्सिडेंट से भरे होते हैं और कुछ में कैंसर विरोधी प्रभाव भी होते हैं।
1. एंटीऑक्सीडेंट
एंटीऑक्सिडेंट हानिकारक मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करते हैं जो पूरे शरीर में कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स लगातार बनते रहते हैं और जब हम जोरदार एक्सरसाइज करते हैं तो इनकी संख्या बढ़ जाती है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन खाते हैं, उनके रक्त में मुक्त कणों का स्तर उन लोगों की तुलना में कम होता है जो नहीं करते हैं।
2. विरोधी भड़काऊ गुण
लाल मिर्च में पाए जाने वाले कैप्साइसिनोइड्स इसके विरोधी भड़काऊ गुणों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। Capsaicin (सक्रिय संघटक) एंडोर्फिन, सेरोटोनिन, डोपामाइन, नॉरपेनेफ्रिन और एसिटाइलकोलाइन की रिहाई को उत्तेजित करता है, ये सभी दर्द से राहत और विश्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कैप्साइसिन गठिया के लक्षणों को दूर करने और तंत्रिका चोट से जुड़ी सूजन को कम करने में मदद करता है।
3. इम्यूनिटी बूस्टर
Capsaicin प्राकृतिक किलर सेल फ़ंक्शन और इंटरफेरॉन उत्पादन दोनों को बढ़ाता है। एनके कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं हैं जो ट्यूमर कोशिकाओं के विनाश में शामिल हैं। इंटरफेरॉन शक्तिशाली एंटीवायरल एजेंट हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं। जब नियमित रूप से लिया जाता है, तो वे हेपेटाइटिस बी वायरस के संक्रमण से बचाते हैं और बार-बार होने वाली सर्दी को रोक सकते हैं। माना जाता है कि मसालेदार भोजन खाने से कुछ विषाणुओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिसमें हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस और इन्फ्लूएंजा ए वायरस शामिल हैं।
4. पाचन सहायता
मिर्च मिर्च में पिपेरिन होता है, एक अल्कलॉइड यौगिक जो पाचन को बढ़ा सकता है और भूख में सुधार कर सकता है। पाइपरिन एंजाइम साइटोक्रोम P450 2D6 को रोकता है, जो एंटीडिप्रेसेंट, जन्म नियंत्रण की गोलियाँ और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं सहित कई दवाओं का चयापचय करता है। हालांकि, पिपेरिन की उच्च सांद्रता के बार-बार संपर्क में आने के बाद यह प्रभाव गायब हो जाता है।
5. वजन घटाना
Capsaicin भूख को कम करता है और पेट खाली करने की गति को तेज करता है। यह वजन घटाने में भी मदद कर सकता है। बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 10 मोटे वयस्कों पर मिर्च मिर्च के प्रभावों का परीक्षण किया। नियमित घंटी मिर्च या लाल मिर्च युक्त भोजन खाने के बाद, विषयों ने कैलोरी खपत में 30% की कमी का अनुभव किया। इससे भी अधिक प्रभावशाली तथ्य यह था कि प्रतिभागियों ने बाद के भोजन में कम कैलोरी खाई। इस घटना के लिए एक स्पष्टीकरण यह हो सकता है कि मसाले परिपूर्णता की भावना पैदा करते हैं। शोध से पता चलता है कि मसालेदार भोजन खाने पर शरीर कम घ्रेलिन, एक हार्मोन पैदा करता है जो भूख का संकेत देता है। नतीजतन, व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करते हैं और लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करते हैं।
6. कैंसर सेनानी
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि ग्रीन टी का अर्क चूहों में कैंसर वाले स्तन ट्यूमर के विकास को रोक सकता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​​​है कि चाय में घटक, विशेष रूप से पॉलीफेनोल्स, एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को अवरुद्ध कर सकते हैं और स्तन ग्रंथियों के अंदर ट्यूमर के गठन को रोक सकते हैं। अन्य अध्ययनों से संकेत मिलता है कि गर्म मिर्च प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में कारगर है। ऑस्ट्रिया के ग्राज़ में यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, मसालेदार भोजन पेट के कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है।
ये तीन अध्ययन गर्म मिर्च के अद्भुत स्वास्थ्य लाभों पर शोध के कुछ उदाहरण हैं। सूची चलती जाती है!

Continue Reading

Health News

Health News-Whether to eat yogurt in fatty liver, know the expert’s opinion

Published

on

By

1. Liver is not fat, it’s a gland.
Liver is the largest gland in the body and contains many different kinds of cells, including hepatocytes (the cells responsible for filtering toxins out of the blood), Kupffer cells (cells that remove pathogens and foreign particles from the bloodstream), and endothelial cells (which maintain blood vessel integrity). Fatty liver occurs when the amount of fats stored inside the hepatocytes exceed the storage capacity of these cells. In the long term, excess lipid accumulation may lead to inflammation, insulin resistance, non-alcoholic fatty liver disease, and even fibrosis/cirrhosis.
2. What causes fatty liver?
The following factors have been associated with the development of fatty liver:
• Diabetes. People who have diabetes tend to store more fat than those without diabetes.
• Metabolic syndrome. A combination of risk factors that includes high cholesterol, high triglycerides, hypertension, and obesity.
• High alcohol consumption. Consumption of alcohol over time increases the chances of developing fatty liver.
• Obesity. Being overweight significantly increases the risk of having fatty liver.
3. How common should we worry about fatty liver?
According to the National Health Survey Report in 2011, about 8% of adults aged 20 years old and older had fatty liver. Among people with type 2 diabetes, roughly half of them have fatty liver. In addition, approximately 11% of American adults were obese in 2009, which means they would be at higher risk of developing fatty liver. Therefore, if you’re concerned about whether you have fatty liver, talk to your doctor. If he or she says you do, you might need to reduce your alcohol intake and lose weight. However, don’t panic just yet. The good news is that lifestyle changes can help manage your risk, and some medications can treat the condition.
4. How does fatty liver develop in practice?
Fatty liver develops slowly over time. Initially, your liver stores extra fat only as deposits around the lobules (small lumps) where hormones and enzymes are produced. Over time, these deposits accumulate enough to reach the size of the lobule. When the deposits become big enough, they begin to disrupt the normal function of the liver cells.
Your liver produces bile, which helps digest food. Bile also carries cholesterol and other lipids back to the intestines after digestion. Cholesterol isn’t toxic per se; however, excessive amounts of it in the bloodstream can eventually cause problems, including atherosclerosis (hardening of arteries), heart attack, stroke, and gallbladder stones.
When your liver is unable to produce bile, it begins storing more fat in the form of triglycerides in the liver. This can affect how your body metabolizes sugar, resulting in diabetes.

 

Your liver also secretes a hormone called human chorionic gonadotropin (HCG) during pregnancy, which helps stimulate ovulation. HCG promotes the maturation of eggs into embryos. Because HCG also stimulates the release of estrogen, women who take birth control pills lose their menstrual cycles. Excessive levels of estrogens can potentially increase the risk of breast cancer in postmenopausal women.

Whether to eat yogurt in fatty liver, know the expert’s opinion

Can we eat curry in Fatty Liver: milk and milk products are very beneficial for health. Whether to eat yogurt in fatty liver or not, learn from the expert.

Yogurt is a great probiotic, very beneficial for the stomach. If your stomach is fine, your overall health is fine. Consuming yogurt helps increase good bacteria in the intestine. This improves your digestion and absorption of nutrients from food. In addition, it also accelerates your metabolism. Yogurt consumption can prove to be very beneficial for strengthening bones, heart as well as keeping skin and hair healthy.

Raspberries, Yogurt, Nature, Fresh

But fatty liver patients are very reluctant to consume yogurt, because yogurt contains fat and it is recommended to avoid consuming foods that are high in fatty liver. This is because in fatty liver condition, the amount of non-essential fat in the cells increases. It is recommended to avoid high-fat, junk and processed foods in this location, as they are difficult to digest and also cause excess fat in the liver. This causes stomach problems, and also problems with weight gain. To know about whether to eat yogurt in fatty liver (eating yogurt in Fatty Liver Good or Bad in Hindi), we spoke to clinical nutritionist and dietitian Garima Goyal. Let’s know if eating yogurt is safe for fatty liver patients.

 

Can we Eat yogurt in fatty Liver

Milk and milk products, according to dietician dignity, are rich in nutrients. They are very beneficial for health. Fatty liver no dare product is harmful as long as it has a limited amount of fat. Eating yogurt in fatty liver is usually not harmful. You should just avoid consuming too fat yogurt. Because if consuming full fat milk and products made from it, it increases the risk of fatty liver and high cholesterol.

 

Is there any harm in eating yogurt in fatty liver?

If you believe the dietitian dignity, then unhealthy fat is present in fat dairy products. For example, full fat milk contains 7.9 grams of fat, of which 4.6 grams are unhygienic fat. If you consume yogurt made from high-fat milk, of course this can make the condition worse. In fatty liver, you should always consume yogurt made from low fat or 0 fat milk. You can also consume lassi if you want. It can help reduce fatty liver. Yogurt or lassi can reduce liver damage. It can also help control blood fat.

 

What experts recommend

According to dietician dignity, milk and milk products are rich in nutrients. They contain many essential nutrients that are not in other foods. These provide important minerals such as calcium, magnesium, phosphorus and potassium. Which are very beneficial for health. Therefore, you should definitely consume dairy products. You just have to take care of the fat content. If you are allergic to dairy products, avoid consuming them.

Continue Reading

Trending

Copyright © 2022 HealthNutrial.com